
that everyone is right in their own way

बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Teri ankhon ka zikar jo mein, apne dil se na karta
Aaj bhi khush hi hota, mein jeene se na darta
Vese to gam zindagi mein, aur bhi likhe hain meri
Kishte kayi aur bhi hai, tere pyar ki udhaari ka vyaj to na bharta…
तेरी आँखों का जिक्र जो मैं, अपने दिल से ना करता..
आज भी खुश ही होता, मैं जीने से ना डरता..
वैसे तो गम जिंदगी में, और भी लिखे हैं मेरी..
किश्तें कई और भी हैं, तेरे प्यार की उधारी का व्याज तो न भरता….