Vo sapneele lamhe kab kho gye pta hi na chala
Rengte the, kab khade ho gaye pta hi na chala
Khilaune to aaj bhi vahi hai, e waqt
Hum kab bade ho gaye pta hi na chala…🤞🏽🍂
वो सपनीले लम्हे कब खो गए पता ही ना चला,
रेंगते थे, कब खड़े हो गए पता ही ना चला,
खिलौने तो आज भी वही है, ए-वक्त,
हम कब बड़े हो गए पता ही ना चला…🤞🏽🍂
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो की इस घर को बचाएं कैसे क़हक़हा आँख का बर्ताव बदल देता है हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा एक कतरे को समंदर नज़र आयें कैसे लाख तलवरे झुकी अती हो गरदन की तरफ सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएं कैसे