मैं बात कर के बात, बढ़ा रहा हूं
फोन से कुछ तस्वीरें,हटा रहा हूं
तेरा नाम याद रख सकूं,इसलिए
तेरे नाम के पासवर्ड लगा रहा हूं
मेरे बाद,है तेरा कोई एक रफ़िक
तुझसे पूछ नहीं रहा,बता रहा हूं
मेरी बात पर, यकीन नहीं है इसे
सोए एक शख्स को,जगा रहा हूं
मैं बात कर के बात, बढ़ा रहा हूं
फोन से कुछ तस्वीरें,हटा रहा हूं
तेरा नाम याद रख सकूं,इसलिए
तेरे नाम के पासवर्ड लगा रहा हूं
मेरे बाद,है तेरा कोई एक रफ़िक
तुझसे पूछ नहीं रहा,बता रहा हूं
मेरी बात पर, यकीन नहीं है इसे
सोए एक शख्स को,जगा रहा हूं
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में
लेकिन उस जल्वा-गह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं
मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त
आह अब मुझ से तिरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा
आज ही ख़ातिर-ए-बीमार शकेबा भी नहीं
बात ये है कि सुकून-ए-दिल-ए-वहशी का मक़ाम
कुंज-ए-ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ’त-ए-सहरा भी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
आह ये मजमा-ए-अहबाब ये बज़्म-ए-ख़ामोश
आज महफ़िल में ‘फ़िराक़’-ए-सुख़न-आरा भी नहीं
ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर
ये भी सच है कि तिरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं
यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना-ए-इश्क़
मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं
फ़ितरत-ए-हुस्न तो मा’लूम है तुझ को हमदम
चारा ही क्या है ब-जुज़ सब्र सो होता भी नहीं
मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि ‘फ़िराक़’
है तिरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं
laali waala chadhda dhalda sooraj
tere warga lagda aa
paaeya ik soott gulabi
tainu baahla fabda aa
ਲਾਲੀ ਵਾਲਾ ਚੜਦਾ ਢਲਦਾ ਸੂਰਜ,
ਤੇਰੇ ਵਰਗਾ ਲੱਗਦਾ ਆ।
ਪਾਇਆ ਇਕ ਸੂਟ ਗੁਲਾਬੀ,
ਤੈਨੂੰ ਬਾਹਲਾ ਫੱਬਦਾ ਆ