Enjoy Every Movement of life!
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।
Manzil tan appe naraz hauni c
jad dil la baitha me
ajhnabi raawan naal
ਮੰਜ਼ਿਲ ਤਾਂ ਆਪੇ ਨਾਰਾਜ਼ ਹੋਣੀ ਸੀ
ਜਦ ਦਿਲ ਲਾ ਬੈਠਾਂ ਮੈਂ
ਅਜਨਬੀ ਰਾਵਾਂ ਨਾਲ
