Tere bina khayal bina manzil de musafir
Tere bina saah aun jaan layi nahi turda..!!
Tere bina zind bina tahniyan ton patte
Tere bina mein jiwe kabran ch murda..!!
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਖ਼ਿਆਲ ਬਿਨਾਂ ਮੰਜ਼ਿਲ ਦੇ ਮੁਸਾਫ਼ਿਰ
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਸਾਹ ਆਉਣ ਜਾਣ ਲਈ ਨਹੀਂ ਤੁਰਦਾ..!!
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਜ਼ਿੰਦ ਬਿਨਾਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਤੋਂ ਪੱਤੇ
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਮੈਂ ਜਿਵੇਂ ਕਬਰਾਂ ‘ਚ ਮੁਰਦਾ..!!
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।