धड़कनों की सिफारिश पर हम चाय पर गए
वरना वो गुलाबी शाम हमसे कजा न होता
अब सामने ही बैठा है महबूब तो क्या बात करे हम
निगाहे बात कर लेता तो वो खफा न होता
Enjoy Every Movement of life!
धड़कनों की सिफारिश पर हम चाय पर गए
वरना वो गुलाबी शाम हमसे कजा न होता
अब सामने ही बैठा है महबूब तो क्या बात करे हम
निगाहे बात कर लेता तो वो खफा न होता

Karlo ibadat bhi is waqt se,
Ke laut aaye bachpan ek baar fir
Jab rukte nahi the pair khuwabon ke piche se
Daudti rahe ye dhadkan ek bar fir…❤️
करलो इबादत भी इस वक्त से,
के लौट आए बचपन एक बार फिर…
जब रुकते नहीं थे पैर ख्वाबों के पीछे से,
दौड़ती रहे ये धड़कन एक बार फिर…❤️