
Ke mein tere kaabil nahi..!!
Hun nafrat kar lawi menu
Ke mein tere kaabil nahi..!!
Enjoy Every Movement of life!

ज़िन्दगी के अंजान सफर में निकल के देखूंगा,
ये मौत का दरिया है तो चल के देखूंगा...
सवाल ये है कि रफ्तार किसकी कितनी है,
मैं हवाओं से आगे निकल कर देखूंगा...
इक मज़ाक अच्छा रहेगा चांद तारों से,
मैं आज शाम से पहले ढल कर देखूंगा...
रोशनी बाटने वालों पर क्या गुजरती है,
आज मैं इक चिराग़ की तरह जल कर देखूंगा...

Tutte kach wangu dil vich paa ke trerra
kis gal da si tainu hankaar ho gya
ajh yaadan vaale safeyaan nu foldeyaan
har akhar chon tera didaar ho gya