Agar hoti koi keemat tumhe paane ki toh khudko bechkar bhi tumhe paa lete
Magar tum mohabbat ho kare kya zid hoti to yuhi lade kya ❤️
Agar hoti koi keemat tumhe paane ki toh khudko bechkar bhi tumhe paa lete
Magar tum mohabbat ho kare kya zid hoti to yuhi lade kya ❤️
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
ज़मीर ज़िंदा रख कबीर जिंदा रखसुल्तान भी बन जाए तो दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रखहार जा चाहे जिंदगी में सब कुछमगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख