Mana ki kismat pe mera koi zor nahi,
Par ye sach hai ke mohabbat meri kamazor nahee,
Us ke dil me, usaki yaado me koi aur hai lekin,
Mere har saans mein usake siva koi aur nahee..
Mana ki kismat pe mera koi zor nahi,
Par ye sach hai ke mohabbat meri kamazor nahee,
Us ke dil me, usaki yaado me koi aur hai lekin,
Mere har saans mein usake siva koi aur nahee..
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।
