Khiza ka daur ho ya ho bahar ka mausam
Mere liye nhi koi karar ka mausam
खिजा का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
Khiza ka daur ho ya ho bahar ka mausam
Mere liye nhi koi karar ka mausam
खिजा का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
Pal vi tu metho dur nahi hunda
Subah shaam khayal rehnda e tera..!!
Rabb hi rakha es masum jaan da
Pta nahi mohobbat ch ki banna e mera..!!
ਪਲ ਵੀ ਤੂੰ ਮੈਥੋਂ ਦੂਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ
ਸੁਬਾਹ ਸ਼ਾਮ ਖ਼ਿਆਲ ਰਹਿੰਦਾ ਏ ਤੇਰਾ..!!
ਰੱਬ ਹੀ ਰਾਖਾ ਇਸ ਮਾਸੂਮ ਜਾਨ ਦਾ
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਮੋਹੁੱਬਤ ‘ਚ ਕੀ ਬਣਨਾ ਏ ਮੇਰਾ..!!
बिछड़ते वक्त,एक दर्द और दे गया
दिल में रहा,फिर दिल ही ले गया
अब खाली बादल है, ज़िंदगी मेरी
वो सर्दी गर्मी, सारे मौसम ले गया
यही सोच कर रोता हूं, अक्सर मैं
किस जगह अपने, कदम ले गया
छोटी-छोटी बात,सोचने वाला मैं
क्यूं बड़ा फैसला, एकदम ले गया
तोहफ़े भी लिए, और दिए बहुत
वो खुशी ले गया, मैं गम ले गया
और फिर होतीं रहीं, बारिशे वहां
मैं जहां से भी आंखें, नम ले गया