Khiza ka daur ho ya ho bahar ka mausam
Mere liye nhi koi karar ka mausam
खिजा का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
Khiza ka daur ho ya ho bahar ka mausam
Mere liye nhi koi karar ka mausam
खिजा का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
ਉਹ ਦੇਵੇ ਮੈਨੂੰ ਧੌਖਾ ਓਹਨੂੰ ਲਗਦਾ ਮੈਨੂੰ ਭਮਕ ਨੀ, ਉਹ ਦੇਵੇ ਮੈਨੂੰ ਝੁਠੇ ਦਿਲਾਸੇ ਓਹਨੂੰ ਲਗਦਾ ਮੈਨੂੰ ਕੁੱਝ ਸਮਜ਼ ਨੀ
ਸੱਜਣਾ ਸਿੱਧੀ ਆਹ ਸਿਧਰੀ ਨੀ….😊
कुछ नहीं है बात में, ये बात चुभती भी तो है,
भोर की पहली किरण भी सांझ में ढलती तो है,
उड़ता हूं मैं बाज़ सा आसमां की उस ऊंचाई में,
जिस तेज ताप पर, थोड़ी हवा चलती तो है,
गिरता हूं मैं उठता हूं कभी धरती कभी अंगड़ाई पे
जिंदगी भी दर बदर पर, जिंदगी चलती तो है,
बात इतनी ही नहीं के कायदे भी अब रो रहे,
सर झुका कर चलती दुनिया देख खलती भी तो है...