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Meri maut di || very sad shayari punjabi

Me suneyaa mere naal ajh kal
nafrat karn lagg pyaa
fir tu duaa kareyaa kar
meri maut di
taa ki tainu mera chehra
baar-baar na dekhna pwe

ਮੈਂ ਸੁਣਿਆ ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਅੱਜਕੱਲ
ਨਫਰਤ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪਿਆਂ
ਫਿਰ ਤੂੰ ਦੁਆ ਕਰਿਆ ਕਰ
ਮੇਰੀ ਮੌਤ ਦੀ
ਤਾਂ ਕਿ ਤੈਨੂੰ ਮੇਰਾ ਚਿਹਰਾ
ਬਾਰ-ਬਾਰ ਨਾ ਦੇਖਣਾ ਪਵੇ

Title: Meri maut di || very sad shayari punjabi

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

Title: कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी


Pyar diyan janjiran || true love Punjabi shayari || Punjabi status

Vare meeh ishqe de ch bhijeya e
Hun banjar ban nhio sukk hona..!!
Eh pyar diyan janjiran ne jakdeya e
Dilon moh tera nhio mukk hona..!!

ਵਰੇ ਮੀਂਹ ਇਸ਼ਕੇ ਦੇ ‘ਚ ਭਿੱਜਿਆ ਏ
ਹੁਣ ਬੰਜਰ ਬਣ ਨਹੀਂਓ ਸੁੱਕ ਹੋਣਾ..!!
ਇਹ ਪਿਆਰ ਦੀਆਂ ਜੰਜੀਰਾਂ ਨੇ ਜਕੜਿਆ ਏ
ਦਿਲੋਂ ਮੋਹ ਤੇਰਾ ਨਹੀਂਓ ਮੁੱਕ ਹੋਣਾ..!!

Title: Pyar diyan janjiran || true love Punjabi shayari || Punjabi status