Poore shehar mein myassar nhi hawa kahi,
Bas meri rooh hai jo dar dar bhatkati hai..
पूरे शहर में मयस्सर नहीं हवा कहीं,
बस मेरी रूह है जो दर दर भटकती है…
Poore shehar mein myassar nhi hawa kahi,
Bas meri rooh hai jo dar dar bhatkati hai..
पूरे शहर में मयस्सर नहीं हवा कहीं,
बस मेरी रूह है जो दर दर भटकती है…
ना हो मुझ पर इतना मेहरबान
तुम्हारी सारी चालाकियां जानता हूं मैं
यह जो आये हो मेरे पास तुम चेहरा बदल कर
तुमसे मोहब्बत की थी कभी तुम्हे अच्छी तरह पहेचानता हूं मैं
हो गई होगी मोहब्बत तुम्हें राकिब के साथ
इतना तोह जानता हूं मैं
-ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
kuchh is tarah se vafa kee misaal deta hu,
savaal karata hai koee to taal deta hu,
usee se khaata hoon aksar phareb manjil ka,
main jisake paanv se kaanta nikaal deta hu…
कुछ इस तरह से वफ़ा की मिसाल देता हु,
सवाल करता है कोई तो टाल देता हु,
उसी से खाता हूँ अक्सर फरेब मंजिल का,
मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हु…