Poore shehar mein myassar nhi hawa kahi,
Bas meri rooh hai jo dar dar bhatkati hai..
पूरे शहर में मयस्सर नहीं हवा कहीं,
बस मेरी रूह है जो दर दर भटकती है…
Poore shehar mein myassar nhi hawa kahi,
Bas meri rooh hai jo dar dar bhatkati hai..
पूरे शहर में मयस्सर नहीं हवा कहीं,
बस मेरी रूह है जो दर दर भटकती है…
रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया वो एक बूंद आँख का पानी हूँ मैं... सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमें कितना भी गहरा जख़्म दे कोई उतना ही ज्यादा मुस्कुरानें की आदत है हमें.. इस अजनबी दुनिया में अकेला ख़्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं.. आँख से देखोगे तो खुश पाओगे दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं अगर रख सकों तो एक निशानी हूं मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं...
हुवा इश्क भी बोहोत
हुए नफरत भी बोहोत
अब बस अकेला छोड़ दो
हो चुका बोहोत