Mita do naam tak mera kitab-e-zindagi se tum
Magar pal-pal rulayegi… satayegi kami meri
मिटा दो नाम तक मेरा किताब-ए-ज़िन्दगी से तुम,
मगर पल-पल रुलाएगी… सताएगी कमी मेरी।
Mita do naam tak mera kitab-e-zindagi se tum
Magar pal-pal rulayegi… satayegi kami meri
मिटा दो नाम तक मेरा किताब-ए-ज़िन्दगी से तुम,
मगर पल-पल रुलाएगी… सताएगी कमी मेरी।

मौसम बदल रहा है, राहें बदल रही हैं,
हवाओं का रुख तो देखो के सांसें बदल रही है,
बदल रहे हैं चेहरे और तस्वीरें बदल रही हैं,
दुआओं में शरीक नहीं पर तकदीरें बदल रही हैं,
बदल रही है नींदें और रातें बदल रही हैं,
करवटों से ज़्यादा अब बातें बदल रही हैं,
छिन जाएगा सबकुछ गर यादें बदल रही हैं,
हवाओं का रुख तो देखो के सांसें बदल रही है...