Mohobbat mein wafa hoti hai wazu ki trah,
Bina wazu ke toh namaz bhi qubool nahi hoti❣️
मोहोब्बत में वफ़ा होती है वज़ू की तरह
बिना वजह के तो नामज़ भी कबूल नही होती❣️
Mohobbat mein wafa hoti hai wazu ki trah,
Bina wazu ke toh namaz bhi qubool nahi hoti❣️
मोहोब्बत में वफ़ा होती है वज़ू की तरह
बिना वजह के तो नामज़ भी कबूल नही होती❣️
Kine diwane suli tange tu
mat paeyaa kar soott kale rang de tu
oehla hi kehar bindi na uto laaeya kar
tere ton guzaarish tu bahar ghat jaaeyaa kar
ਕਿਨੇਂ ਦਿਵਾਨੇ ਸੁਲੀ ਟੰਗੇ ਤੂੰ
ਮੱਤ ਪਾਇਆ ਕਰ ਸ਼ੂਟ ਕਾਲ਼ੇ ਰੰਗ ਦੇ ਤੂੰ
ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਕਹੀਰ ਬਿਂਦੀ ਨਾ ਉਤੋਂ ਲਾਇਆ ਕਰ
ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਗੁਜ਼ਾਰਿਸ਼ ਤੂੰ ਬਾਹਰ ਘੱਟ ਜਾਇਆਂ ਕਰ
महर-ओ- वफ़ा की शमआ जलाते तो बात थी
इंसानियत का पास निभाते तो बात थी
जम्हूरियत की शान बढ़ाते तो बात थी
फ़िरक़ा परस्तियों को मिटाते तो बात थी
जिससे कि दूर होतीं कुदूरत की ज़ुल्मतें
ऐसा कोई चराग़ जलाते तो बात थी
जम्हूरियत का जश्न मुबारक तो है मगर
जम्हूरियत की जान बचाते तो बात थी
ज़रदार से यह हाथ मिलाना बजा मगर
नादार को गले से लगाते तो बात थी
बर्बाद होने का तो कोई ग़म नहीं मगर
अपना बनाके मुझको मिटाते तो बात थी
हिंदुस्तान की क़सम ऐ रेख़्ता हूँ ख़ुश
पर मुंसिफ़ी की बात बताते तो बात थी