बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
मुकम्मल ना हुआ इश्क तोह मेरा किया कसूर
यह तोह तेरी और तकदीर की मेहरबानी है
और बहुत फ़िक्र ना किया कर अब
अधुरा इश्क रहे ना तोह सच्ची मोहब्बत की निशानी हैं
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷

Maaru jhakhrran vich plyaa main
pide va-vrole vekh ni ghabraunda
beshak hun tahniyo tuttiyaa main
vekhi eddi chheti ni murjaunda