बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
वो हुज़रा हमको,मक़ान से प्यारा है
उसका इश्क़ हमे, ज़ान से प्यारा है
नफ़रत करता है,अफताफ अंधेरे से
जुगनू को अंधेरा,ज़हान से प्यारा है
तुम्हारे मुंह से,ये अच्छा नहीं लगता
उसका नाम,मेरी ज़ुबान से प्यारा है
वाकी सारे है, इन सितारों की तरह
बस वो एक चेहरा, चांद से प्यारा है
सब काट के,एक लकीर उसकी बना
वो नफा,हज़ार नुकसान से प्यारा है
घूम लो जाकर, हज़ारों देश विदेश
कोई नहीं,जो हिंदुस्तान से प्यारा है

Kali raat aajh
na laattuaan di chamak na diviaan di loo
chhayiaa matam
jiven raunak da putar liya hove kise kho