बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा

Bhej da haan me sunehe
roj tareyaan de hathi
pata hunda tainu
je kade tu v raati uth ke
tareyaan nu takeyaa hunda
Aajkal ek naya nasha kar rahe hain hum
Tere khato ko jalakar dhua dhua kar rahe hain hum
Aaj aakhri baar palkein bhiga rahe hain hum
Kal se tujhe teri yaad sabko bhula rahe hain hum 💔
आज कल एक नया नशा कर रहे है हम
तेरे खतो को जलाकर धुआं धुआं कर रहे है हम
आज आखरी बार पलके भीगा रहे है हम
कल से तुझे तेरी याद सबको भुला रहे है हम💔