बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Ye pyar hai pyar
Waqt waqt pe imtehan leta hai…
dusre ke khusi ke liye
Kabhi kabhi bewajah inzam deta hai…
Nayab hai ye ehsas ,
Esmein fiza he lagti kuch rangeen hai…
Dil ke darbar mein amer na fakir koi
Yahi baat mohabbat ke sabse Nazneen hai…
रखना है तो दिल में रखना इस मोहब्बत भरे चेहरे को,
ये वो चेहरा है जो रास्ते पर कभी नजर नहीं आता,
नज़र आते है गुलदस्ते कई जब गलियों में गुजरता हूं,
मै उन गुलदस्तों के लिए रास्ते पर कभी नज़र नहीं आता,
नजरबंद कर लेता हूं रास्ते सारे, दोस्तों के इंतेज़ार में,
यारों के अलावा रास्तों पर मुझे कोई नज़र नहीं आता....