बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
मैं चांद तारे तोड़ के तो नहीं ला सकता
पर आपके लिए काजल ज़रूर ले आऊंगा ,
वादा नहीं करता की कभी रोने नहीं दूंगा,
पर वादा करता हु उस समय अकेला नहीं छोड़ूंगा ❤️
Zuban toh khol, najar toh mila, jabab toh de
Mein kitni baar loota hu, mujhe hisab toh de❤️
tere badan ki likhawat me hai utar chadhaw
Mein tujhko kese padhunga, mujhe kitaab toh de….🙃
जुबा तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो दे
में कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे❤️
तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढाव
में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे🙃