बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा

यू जो हो जाता है सब पे ऐतवारे मोहब्बत…
ये इश्क है या हो गया है बाजारे मोहब्बत….
टुटे दिल की भी कीमत लगा रहे हैं लोग….
क्या खरीदेंगे ये कीरदारे मोहब्बत…
कई लोग आए और चले गए इस बाजार से
बचा ना कि आज तक जमीदारे मोहब्बत
जिसे मिली वो रख न सका, जिसे मिली वो रह न सका
बड़ी बेमन है ये इमंदारे मोहब्बत
दिन या रात गुज़रते ह तुम्हें ही सोच कर महविश
चक रहे ह अब हम भी ये बीमार ए मोहब्बत🥀