बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा

Mohabbat ho gayi hai shayad
Mai firse chaand ko pane chala hu
Bhut roya tha ek bar jo krke
Wahi galti firse dohrane chala hu🍂
मोहोब्बत हो गई है शायद
मैं फिर से चाँद को पाने चला हूँ
बहुत रोया था एक बार जो करके
वही गलती फिर से दोहराने चला हूँ🍂