बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Saadhiyaan buraayiaan da shor har jagah hai
tu das tere sunan ch ki aayea
ਸਾਡੀਆਂ ਬੁਰਾਈਆਂ ਦਾ ਸ਼ੋਰ ਹਰ ਜਗਾ ਹੈ
ਤੂੰ ਦੱਸ ਤੇਰੇ ਸੁਣਨ ਚ ਕੀ ਆਇਆ !..
Can’t forget
Jo zindgi mein ek bar aa jate hain..
Vo asaani se bhulaye kahan jate hain..
Pagal..💕
