बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा

Kuch jakham kitaabon mein rakh diye
Kuch ko alfaazon mein smet diya
Kuch fool bankar mile hmein
Aur kuch ne hum hi ko smet diya 💔
कुछ जख्म किताबो में रख दिए
कुछ को अल्फाजो में समेट दिया
कुछ फूल बनकर मिले हमे
और कुछ ने हम ही को समेट दिया💔