बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Ke tu hi marham zakhma te hun
Dil nu dassdi rehni aaan..!!
Soch Soch ke tenu sajjna
Ikalli hassdi rehni aaan..!!
Haase rone pyar tere to
Waqt ho gya sikhdi nu..!!
Sach dssa menu sang jhi aawe
chithiya pattar likhdi nu..!!
ਕਿ ਤੂੰ ਹੀ ਮਰਹਮ ਜਖਮਾਂ ਤੇ ਹੁਣ
ਦਿਲ ਨੂੰ ਦੱਸਦੀ ਰਹਿਨੀ ਆਂ..!!
ਸੋਚ ਸੋਚ ਕੇ ਤੈਨੂੰ ਸੱਜਣਾ
ਇਕੱਲੀ ਹੱਸਦੀ ਰਹਿਨੀ ਆਂ..!!
ਹਾਸੇ ਰੋਣੇ ਪਿਆਰ ਤੇਰੇ ਤੋਂ
ਵਕਤ ਹੋ ਗਿਆ ਸਿੱਖਦੀ ਨੂੰ..!!
ਸੱਚ ਦੱਸਾਂ ਮੈਨੂੰ ਸੰਗ ਜਿਹੀ ਆਵੇ
ਚਿੱਠੀਆਂ ਪੱਤਰ ਲਿਖਦੀ ਨੂੰ..!!
सच्ची है मेरी दोस्ती आजमा के देख लो,
करके यकीं मुझ पे मेरे पास आ के देख लो,
बदलता नहीं कभी सोना अपना रंग,
जितनी बार चाहे आग लगा कर देख लो !!