बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Tere toh hatt keh nazar kise hor tah nah hoyi,
Jeh ajj tu meri ta Kal kise hor di nah hoyi ❤️
ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਹਟ ਕੇ ਨਜ਼ਰ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਥਾਂ ਨਾ ਹੋਈ
ਜੇ ਅੱਜ ਤੂੰ ਮੇਰੀ ਤਾਂ ਕੱਲ੍ਹ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਦੀ ਨਾ ਹੋਈ ❤️
