बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
Enjoy Every Movement of life!
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा

ਹਮੇਸ਼ਾ ਤਿਆਰੀ ‘ਚ ਰਿਹਾ ਕਰੋ ਜਨਾਬ, ਮੌਸਮ ਤੇ ਇਨਸਾਨ ਕਦੋਂ ਬਦਲ ਜਾਣ ਕੋਈ ਪਤਾ ਨਹੀਂ💯
Hmesha tyari ‘ch rhe kro jnab, mosam te insan kde badal Jan koi pata nhi 💯