बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर ब_दर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज__दुआ में मौत मांगा पड़ा
करवट बदलकर सोने की कोशिश की, नींद फिर भी ना आई..
रात कमरे में बस हम दोनो थे, मैं और मेरी तनहाई..
उसे पसंद नहीं मुझसे दूर जाना, और मैने कभी वो पास ना बुलाई..
आखिर में बैठकर बातें की उससे, और जान पहचान बढ़ाई..
उसने कहा साथ उसे अच्छा लगता है मेरा, पर मुझे वो रास न आई..
समझाया उसे दूर होजा मुझसे, इतनी सी बात भी उसे समझ ना आई..
आखिर में अपनाना पड़ा उसे, वो तो मुझे छोड़ ना पाई..
जब अपनाकर उसे, आंखें बंद की मैने, तब जाकर कहीं मुझे नींद आई….
Poh da mahina ate raatan kaliyan ch
Asi vi dubb gye akhan surme valiyan ch
Mein keha, “acha ji, sat shri akaal!
Kehndi baith sardara! Ghutt Chaa taan pi lyiye piyaliyan ch 😍
ਪੋਹ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਅਤੇ ਰਾਤਾਂ ਕਾਲੀਆਂ ‘ਚ
ਅਸੀ ਵੀ ਡੁੱਬ ਗਏ ਅੱਖਾਂ ਸੁਰਮੇ ਵਾਲੀਆਂ ‘ਚ
ਮੈ ਕਿਹਾ ,”ਅੱਛਾ ਜੀ , ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਆਕਾਲ !
ਕਹਿੰਦੀ ਬੈਠ ਸਰਦਾਰਾ! ਘੁੱਟ ਚਾਅ ਤਾਂ ਪੀ ਲਈਏ ਪਿਆਲੀਆਂ ‘ਚ 😍