
Par tere layi mohobbat byan nahi ho pa rahi..!!

नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया, मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया। फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर, गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया। सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो, नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया। कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत, सद्भावना के फूल पिरोता चला गया। जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं, विश्वास अपने आप पर होता चला गया। अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां, मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया। उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग, हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...
Tu vi jaag raatan katt
So asi vi nahi pauna..!!
Chain tenu vi nahi aunda
Chain sanu vi nahi auna..!!
ਤੂੰ ਵੀ ਜਾਗ ਰਾਤਾਂ ਕੱਟ
ਸੋ ਅਸੀਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣਾ..!!
ਚੈਨ ਤੈਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ
ਚੈਨ ਸਾਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ..!!