
Mohobbat rahe bas naal mere..!!
Mohobbat e menu mohobbat naal
Jo mohobbat hoyi e naal tere..!!

Aksar tere takk aa ke mukki janda e
Kise manzil di khwahish ch meriyan socha da safar..!!
ਅਕਸਰ ਤੇਰੇ ਤੱਕ ਆ ਕੇ ਮੁੱਕ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਕਿਸੇ ਮੰਜ਼ਿਲ ਦੀ ਖੁਆਹਿਸ਼ ‘ਚ ਮੇਰੀਆਂ ਸੋਚਾਂ ਦਾ ਸਫ਼ਰ..!!
कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी