Dekh tu meri Muhabbat tak nhi Sambhal paya
Aur mai teri nafratt ko aaj bhi Sambhale rakhe hu
Dekh tu meri Muhabbat tak nhi Sambhal paya
Aur mai teri nafratt ko aaj bhi Sambhale rakhe hu
राहे कितनी अंजान सी, मेरी खामोशी मेरी जुबान सी
वो लड़की वो नादान सी, वो हर पल मेरी जान सी I
इन आंखों में कभी अश्क सी, कभी लबो पे मुस्कान सी
सिमट जाए जो वो तो तिनका भर ये जहान, खुल के झूम तो आसमान सी
वो आंखों में एक नमी सी, वो जीवन में एक कमी सीधड़कने दफन उसके बिना इस दिल में और सांसे थमी- थमी सी
रखे ख्वाहिश भी क्या एक उसे पाने के सिवा मेरे जीवन में वो मुकाम सी I
वो लड़की वो नादान सी, वो हर पल मेरी जान सी I
Maine khel hamesha khud ke dam par khele hai
isliye tere jaise aaj mere chele hai
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है
इसीलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है..