मुकम्मल ना हुआ इश्क तोह मेरा किया कसूर
यह तोह तेरी और तकदीर की मेहरबानी है
और बहुत फ़िक्र ना किया कर अब
अधुरा इश्क रहे ना तोह सच्ची मोहब्बत की निशानी हैं
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
मुकम्मल ना हुआ इश्क तोह मेरा किया कसूर
यह तोह तेरी और तकदीर की मेहरबानी है
और बहुत फ़िक्र ना किया कर अब
अधुरा इश्क रहे ना तोह सच्ची मोहब्बत की निशानी हैं
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Tumhare jane ke baad
Yahi vaada khud se kiya tha
Tum laut ke aayoge
Yahi bahana khud ko diya tha💔
तुम्हारे जाने के बाद
यही वादा खुद से किया था
तुम लोट के आओ गे
यही बहाना खुद को दिया था💔
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा