Laakh samjhaeya usko ke duniyaa shak karti hai
magar uski aadat nahi gai muskura kar guzarne ki
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नहीं गई मुस्कुरा कर गुजरने की
Laakh samjhaeya usko ke duniyaa shak karti hai
magar uski aadat nahi gai muskura kar guzarne ki
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नहीं गई मुस्कुरा कर गुजरने की
Mar ke mitti mein milunga,
Khaad ho jaunga mein.
Phir khilunga saakh par,
Aabaad ho jaunga mein..
Baar baar aaunga tere najar ke saamne,
Aur phir ek roz teri yaad hojaunga mein…
मर के मिट्टी में मिलूंगा
खाद हो जाऊंगा मैं
फिर खिलूंगा साख पर
आबाद हो जाऊंगा मैं
बार बार आऊंगा तेरी नजर के सामने
और फिर एक रोज तेरी याद हो जाऊंगा मैं
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा
न कोई चिराग अब जलाऊंगा,न कोई अंधेरा मिटाऊंगा
जो रह गई याद तो उसे नदियों में बहाऊंगा
जो मिल गए राहों में तो रस्ता बदल जाऊंगा
बांधा था जिस रिश्ते से वो रिश्ता तोड़ जाऊंगा
नीर भरे नयनों में एक तड़प छोड़ जाऊंगा
कीचड़ ही सही एक दिन कमल बन खिल जाऊंगा
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा