Laakh samjhaeya usko ke duniyaa shak karti hai
magar uski aadat nahi gai muskura kar guzarne ki
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नहीं गई मुस्कुरा कर गुजरने की
Laakh samjhaeya usko ke duniyaa shak karti hai
magar uski aadat nahi gai muskura kar guzarne ki
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नहीं गई मुस्कुरा कर गुजरने की
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।
izteraab me h zindagi meri..
Ab toh dard me hi araam rakha h…
Tu ab bhi nhi bikhra modassir tere rab ne tujhe thaam rakha h !!!