के कलियों सी मुस्कुराती हो
फूलो सा शर्माती हो
और पता नही क्यों तू मुझे इस तरह देखकर
इस तरह फिसल जाती हो
Enjoy Every Movement of life!
के कलियों सी मुस्कुराती हो
फूलो सा शर्माती हो
और पता नही क्यों तू मुझे इस तरह देखकर
इस तरह फिसल जाती हो
Aaj Hamari Baaton Ka Jawab Nahi Dete Na Do,
Aaoge Jab Hamari Kabar Par, Hum Bhi Aisa Hi Karenge!
जिन्हें मोहब्बत थी मेरी मुस्कानों से
वे आज मेरा जिस्म चाहने लगे हैं
जो चाहते थे मैं हमेशा मुस्कुराऊं
वे आज मेरी मुस्कान ही छीनने लगे हैं
