के कलियों सी मुस्कुराती हो
फूलो सा शर्माती हो
और पता नही क्यों तू मुझे इस तरह देखकर
इस तरह फिसल जाती हो
के कलियों सी मुस्कुराती हो
फूलो सा शर्माती हो
और पता नही क्यों तू मुझे इस तरह देखकर
इस तरह फिसल जाती हो
samandar ke beech pahunch kar fareb kiya usane,
vo kahata to sahee… kinaare par hee doob jaate ham..
समंदर के बीच पहुँच कर फ़रेब किया उसने,
वो कहता तो सही… किनारे पर ही डूब जाते हम..
Chale ja rahe hain besudh se hokar is zmane mein
Shehad ki mithas dhund rahe the hum kadve paimane mein
Chote the na samjhe zindagi ka khel, adhi umar guzar gayi anjane mein
Ab baki ki umar tamam ho rahi hai, bas noto ko kmane mein..🙌
चले जा रहे हैं हम बेसुध से होकर, इस जमाने में..
शहद की मिठास ढूंढ़ रहे थे हम, कडवे पैमाने में..
छोटे थे ना समझे जिंदगी का खेल, आधी उम्र गुजर गई अंजाने में..
अब बाकी की उम्र तमाम हो रही है, बस नोटों को कमाने में..🙌