ना मंजिल रही ना रास्ता रहा
ये कैसी उलझन में डाल दिया
ना मिल पा रहे है ना दूर जा रहे है
ये कैसे वहम में हमको डाल दिया
ना मंजिल रही ना रास्ता रहा
ये कैसी उलझन में डाल दिया
ना मिल पा रहे है ना दूर जा रहे है
ये कैसे वहम में हमको डाल दिया
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला
तरुण चौधरी
Pattharo se mohabbat ka sawal karte ho💔
Tum bhi galib kamal karte ho😊
पथरों से मोहोब्बत का सवाल करते हो💔
तुम भी ग़ालिब कमाल करते हो😊