Yaha kisko mila hai wo Jo use pasand aaya ho,
Na pasand ko pasand banaya hai har kisi ne…….🙌
यहाँ किसको मिला है वो जो उसे पसंद आया हो,
न पसंद को पसंद बनाया है हर किसी ने……🙌
Yaha kisko mila hai wo Jo use pasand aaya ho,
Na pasand ko pasand banaya hai har kisi ne…….🙌
यहाँ किसको मिला है वो जो उसे पसंद आया हो,
न पसंद को पसंद बनाया है हर किसी ने……🙌
बाहर से दिख ने में कुछ पता नहीं चलता।
पानी के अंदर में धारा का प्रवाह बहता।
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वोट देते हैं लोगों, लेकिन विजेता नेता।
नेता बनते है महान, सिर्फ आम ही रहे जाते हैं जनता।
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कवि बुद्धिजीवी और बुद्धिमान दोनों ही होते।
बहुत सारे बुद्धिजीवी बुद्धिमान नहीं हैं और बहुत बुद्धिमान भी बुद्धिजीवी हो नहीं पाते।
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कोविशिल्ड और कोवैक्सीन में सिर्फ नाम का अंतर।
सब इंसान एक हैं, अलग हैं व्यवहार।
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बारिश हो रही है, होने दो।
इंसान दुखी है, रोने दो।
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जिंदगी का मतलब हर वक्त पर दर्द को सम्हालना।
दवा और मलहम नियति की हात का खिलौना।
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दिल की बात रखो दिल में।
दूसरे जानकर मजा लेंगे और दिल जलेगी आग में।
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भूख जिसे चोरी करना सिखाया, वो बेकसूर है।
असली चोर तो वो है, जो ज्यादा खा के भी लालच करता है।
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कुत्ते के साथ मुँह मत लगाना।
गंदे के मुँह मत देखना।
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घने बादल हमेशा बारिश नहीं लाते।
कभी कभी ख़ुशी में भी गम नहीं जाते।
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अगर औरत की साथ प्यार हो तो वो रोमांस है।
लेकिन कोई मर्द का साथ प्यार हो ना ओफ्फेंस है।
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सब दोस्ती प्यार नहीं बनते।
सब रिश्ते रिश्तेदार भी नहीं लाते।
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पागलखाने में पागल नहीं रहते।
पागलपन सब के दिमाग में, मानसिक इसे ही कहते।
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पूजा जितना भी करो, मंत्र हज़ार बार पढ़ो, भगवान खुश नहीं।
लोकतंत्र की पुजारी ही असली पुजारी, सच यही।
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चादर में सोए रहो या बिस्तर पर, नींद होनी चाहिए।
दिल से प्यार करो या दिमाग से, आस्था होनी चाहिए।
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पहाड़ से नदी निकलती है और मिलती है सागर में।
पत्थर गतिरोधक, नदी जीवन की गति और समुद्र नियति है।
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Kudrat naal kita khilwaad kithe raas aunda e
eho same da pahiyaa ghumke use hi thaa aunda e
paidh, pashuu, pakshi asin ehna de ghar ujaadhe ne kudrat da kehar dekho insaan pinjhre wangu ghara ch taadhe ne
Ajh kive insaan nu insaan pyaa bachondaa ae
Bejubaan jivaa nu taa rabb hi insaab dawaunda e
eh samaa v langh jaugaa , raaje, mudhke na hankaar kari
kudrat saanu rab di den e rabb wangu pyaar kari|
ਕੁਦਰਤ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਖਿਲਵਾੜ ਕਿੱਥੇ ਰਾਸ ਆਉਂਦਾ ਏ
ਇਹੋ ਸਮੇਂ ਦਾ ਪਹੀਆ ਘੁੰਮਕੇ ਓਸੇ ਹੀ ਥਾਂ ਆਉਂਦਾ ਏ
ਪੈੜ,ਪਸ਼ੂ, ਪਕਸ਼ੀ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਘਰ ਉਜਾੜੇ ਨੇ ਕੁਦਰਤ ਦਾ ਕਹਿਰ ਦੇਖੋ ਇਨਸਾਨ ਪਿੰਜਰੇ ਵਾਂਗੂੰ ਘਰਾਂ ਚ ਤਾੜਏ ਨੇ
ਅੱਜ ਕਿਵੇਂ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਇਨਸਾਨ ਪਿਆ ਬਚੋਂਦਾ ਏ
ਬੇਜੁਬਾਨ ਜੀਵਾ ਨੂੰ ਤਾਂ ਰੱਬ ਹੀ ਇਨਸਾਫ ਦਵੋਂਦਾ ਏ
ਇਹ ਸਮਾ ਵੀ ਲੰਘ ਜਾਊਗਾ ,,ਰਾਜੇ,,ਮੁੜਕੇ ਨਾ ਹੰਕਾਰ ਕਰੀ
ਕੁਦਰਤ ਸਾਨੂੰ ਰੱਬ ਦੀ ਦੇਣ ਏ ਰੱਬ ਵਾਂਗੂੰ ਪਿਆਰ ਕਰੀ।
✍️ਸਮਰਾ