
Na chadeyaa koi din sadhe lai
na aai kade puneyaa di raat
na pyar samajh saki tu mera
na samajh saki jajhbaat

Na chadeyaa koi din sadhe lai
na aai kade puneyaa di raat
na pyar samajh saki tu mera
na samajh saki jajhbaat
कुछ हलचल सी है सीने में
सुकून कुछ खोया – सा है
जाने कैसी है ये अनुभूति
दिल कुछ रोया – सा है
कुछ आहट सी आयी है
और दिल कुछ धड़का – सा है।
हाथ – पाँव में हो रही कंपन-सी
बेचैनी ये जानी पहचानी – सी है
सांसे भी है कुछ थमी – सी
कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में
मेरी आहें भी हैं कुछ जमी – सी।
पलकें अब मूँदने लगी हैं
साँसें अब क्षीण पड़ रही हैं
अब तो आ जाओ इन लम्हों में
जाने कब लौटोगे?
आने का वादा था और ना भी था तो,
तुम्हारा इन्तज़ार तो था..
सारी हदें तोड़ कर आ जाओ
दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ
चंद लम्हों के लिए ही,
अब तो आ जाओ
मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |
ਗੋਰੇ ਰੰਗ ਤੇ ਅਸੀਂ ਮਰਦੇ ਨਾਂ,
ਦਿੱਲ ਸਾਫ਼ ਦੀ ਕਦਰ ਕਰਦੇ ਹਾਂ,
ਪਿਆਰ ਤਾਂ ਸਿਰਫ ਇਕ ਨੂੰ ਕਰਾਂਗੇ,
ਹਰ ਕਿਸੇ ਤੇ ਅਸੀਂ ਮਰਦੇ ਨਾਂ