Enjoy Every Movement of life!
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...
ਜੀਹਦੇ ਲੱਗੀ ਓਹੀ ਜਾਣੇ, ਨੁਕਸਾਨ ਝੱਲ ਕੇ ਤਾਂ ਦੇਖ ।
ਕੱਲਾ ਤਾਂ ਵੈਸੇ ਹੀ ਚਮਕਦਾ
ਤੇਰਾ ਮੁੱਲ ਕੀ ਪੈਣਾ, ਪਥਰਾਂ ਚ ਰਲ਼ ਕੇ ਤਾਂ ਦੇਖ ।।
#sam
