eh naraazgi hun taa bhulaa de
eh daur eda da chal reha hai
jin te maran da kujh pata ni
ਐਹ ਨਰਾਜ਼ਗੀ ਹੂਣ ਤਾਂ ਭੁਲਾ ਦੇ
ਐਹ ਦੋਰ ਇਦਾਂ ਦਾ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ
ਜਿਨ ਤੇ ਮਰਣ ਦਾ ਕੁਝ ਪਤਾ ਨਹੀਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
eh naraazgi hun taa bhulaa de
eh daur eda da chal reha hai
jin te maran da kujh pata ni
ਐਹ ਨਰਾਜ਼ਗੀ ਹੂਣ ਤਾਂ ਭੁਲਾ ਦੇ
ਐਹ ਦੋਰ ਇਦਾਂ ਦਾ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ
ਜਿਨ ਤੇ ਮਰਣ ਦਾ ਕੁਝ ਪਤਾ ਨਹੀਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
स्त्री हूं मैं मेरा कहां सम्मान होता है
मेरे कपड़ों से मेरा चरित्र भाप लिया जाता है।
अगर जींस या वेस्टर्न ड्रेस पहन लूं मैं
तो मैं बिगड़ी हुई मान ली जाती हूं।
अगर मैं साड़ी भी पहनूं तो भी
उसमे भी खोट नजर आती है।
मेरी साड़ी में भी कमिया ही नजर आती है।
यहां तो एक औरत भी औरत का सम्मान नही करती
एक औरत को दूसरी औरत में भी खोट नजर आती है।
मेरे कपड़ों में कोई कमी नहीं कमी तुम्हारी नज़र में है
मैं कुछ भी पहन लूं तुम्हे कमी नजर आनी ही है।