kyoo baar baar taakte ho sheeshe ko,
nazar lagaoge kya meree iklautee muhabbat ko…
क्यू बार बार ताकते हो शीशे को,
नज़र लगाओगे क्या मेरी इकलौती मुहब्बत को…
kyoo baar baar taakte ho sheeshe ko,
nazar lagaoge kya meree iklautee muhabbat ko…
क्यू बार बार ताकते हो शीशे को,
नज़र लगाओगे क्या मेरी इकलौती मुहब्बत को…
Ohnu mere ch khaamiyaan millgiyan
ya kehlo kise nawe ch khoobiyan 😊
ਉਹਨੂੰ ਮੇਰੇ ‘ਚ ਖ਼ਾਮੀਆਂ ਮਿਲ ਗਈਆਂ
ਜਾਂ ਕਹਿ ਲਓ ਕਿਸੇ ਨਵੇਂ ‘ਚ ਖੂਬੀਆਂ 😊
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…