Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Bure waqt to badal jaata hai
lekin bura waqt aur bure waqt me badle huye insaan yaad reh jaate hai
बुरे वक्त तो बदल जाता हैं,
लेकिन बुरा वक्त और बुरे वक्त मे बदले हुए इंसान याद रह जाते हैं।
