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Oh lazmi e meri rooh nu || sacha pyar shayari images || Punjabi status

Sacha pyar shayari. True love Punjabi shayari. Punjabi status. Punjabi shayari images.
Khid jawe mera dil milan te
Ohde khayalan di ikk shooh nu..!!
Uston bina eh saah vi na kam de ne
Oh lazmi e meri rooh nu..!!
Khid jawe mera dil milan te
Ohde khayalan di ikk shooh nu..!!
Uston bina eh saah vi na kam de ne
Oh lazmi e meri rooh nu..!!

Title: Oh lazmi e meri rooh nu || sacha pyar shayari images || Punjabi status

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Hindi poetry || zindagi

चल रहा महाभारत का रण, जल रहा धरित्री का सुहाग,
फट कुरुक्षेत्र में खेल रही, नर के भीतर की कुटिल आग।
वाजियों-गजों की लोथों में, गिर रहे मनुज के छिन्न अंग,
बह रहा चतुष्पद और द्विपद का रुधिर मिश्र हो एक संग।

गत्वर, गैरेय,सुघर भूधर से, लिए रक्त-रंजित शरीर,
थे जूझ रहे कौंतेय-कर्ण, क्षण-क्षण करते गर्जन गंभीर।
दोनों रण-कुशल धनुर्धर नर, दोनों सम बल, दोनों समर्थ,
दोनों पर दोनों की अमोघ, थी विशिख वृष्टि हो रही व्यर्थ।

इतने में शर के लिए कर्ण ने, देखा ज्यों अपना निषंग,
तरकस में से फुंकार उठा, कोई प्रचंड विषधर भुजंग।
कहता कि कर्ण ! मैं अश्वसेन, विश्रुत भुजंगों का स्वामी हूँ,
जन्म से पार्थ का शत्रु परम, तेरा बहुविधि हितकामी हूँ।

बस एक बार कर कृपा धनुष पर, चढ़ शख्य तक जाने दे,
इस महाशत्रु को अभी तुरत, स्पंदन में मुझे सुलाने दे।
कर वमन गरल जीवन-भर का, संचित प्रतिशोध, उतारूँगा,
तू मुझे सहारा दे, बढ़कर, मैं अभी पार्थ को मारूँगा।

राधेय ज़रा हँसकर बोला, रे कुटिल ! बात क्या कहता है?
जय का समस्त साधन नर का, अपनी बाहों में रहता है।
उसपर भी साँपों से मिलकर मैं मनुज, मनुज से युद्ध करूँ?
जीवन-भर जो निष्ठा पाली, उससे आचरण विरुद्ध करूँ?
तेरी सहायता से जय तो, मैं अनायास पा जाऊँगा,
आनेवाली मानवता को, लेकिन क्या मुख दिखलाऊँगा?
संसार कहेगा, जीवन का, सब सुकृत कर्ण ने क्षार किया,
प्रतिभट के वध के लिए, सर्प का पापी ने साहाय्य लिया।

रे अश्वसेन ! तेरे अनेक वंशज हैं छिपे नरों में भी,
सीमित वन में ही नहीं, बहुत बसते पुरग्राम-घरों में भी।
ये नर-भुजंग मानवता का, पथ कठिन बहुत कर देते हैं,
प्रतिबल के वध के लिए नीच, साहाय्य सर्प का लेते हैं।
ऐसा न हो कि इन साँपों में, मेरा भी उज्ज्वल नाम चढ़े,
पाकर मेरा आदर्श और कुछ, नरता का यह पाप बढ़े।
अर्जुन है मेरा शत्रु, किन्तु वह सर्प नहीं, नर ही तो है,
संघर्ष, सनातन नहीं, शत्रुता, इस जीवन-भर ही तो है।

अगला जीवन किसलिए भला, तब हो द्वेषांध बिगाड़ूँ मैं,
साँपों की जाकर शरण, सर्प बन, क्यों मनुष्य को मारूँ मैं?
जा भाग, मनुज का सहज शत्रु, मित्रता न मेरी पा सकता,
मैं किसी हेतु भी यह कलंक, अपने पर नहीं लगा सकता

Title: Hindi poetry || zindagi


MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry

ਕਹਿੰਦੀ ਤੂੰ ਡਰਿਆ ਨਾ ਕਰ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਮੈਂ ਹੈਗੀ ਆ
ਤਪਦੀ ਧੁੱਪ ਤੇ ਵਿਚ ਦੁਪਹਿਰੇ 
ਜਲ ਗਈ ਚਮੜੀ ਤੇ ਸੁੱਖ ਗਏ ਚੇਹਰੇ
ਬੱਚੇ ਆਪਣੇ ਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੇ ਲਈ 
ਲੱਗੀ ਰਹੀ ਓਹ ਵਿਚ ਹਨੇਰੇ 
ਸੁੱਕ ਜਾਵੇ ਗਲ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਮੰਗੇ
ਲੋਕ ਵੇਖਦੇ ਰਹਿ ਗਏ ਚਾਰ ਚੁਫੇਰੇ 
ਮੂੰਹ ਦੇ ਵਿੱਚੋ ਉਫ਼ ਨਾ ਨਿਕਲੇ 
ਵੇਖ ਤਾਂ ਸਹੀ ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਦੇ ਜੇਰੇ…
ਚਾਰੋਂ ਪਹਿਰ ਕੰਮ ਆ ਕਰਦੀ 
ਭੁੱਲ ਗਈ ਹੱਸਣਾ ਤੇ ਆਰਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਚਾਰ ਪਾਈ ਤੇ ਨਾ ਪੈ ਕੇ ਵੇਖੇ 
ਲੱਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਪੈਰਾਂ ਵਿਚ ਛਾਲੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਤੁਰਕੇ 
ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਗੋਦ ਚੋਂ ਲਾਹੁੰਦੀ ਨਈ 
ਨਾ ਖਾਣ ਦੀ ਫ਼ਿਕਰ ਨਾ ਸੌਣ ਦੀ 
ਓਹ ਤਾਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ਅੱਖ ਵੀ ਲਾਉਂਦੀ ਨਈ 
ਰਾਤ ਹਨੇਰੇ ਡਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ
ਹਰ ਸਪਨੇ ਦੇ ਵਿਚ ਮਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ 
ਤੈਨੂੰ ਲੈ ਜਾਣਾ ਮੈਂ ਨਾਲ ਆਪਣੇ
ਮੌਤ ਮੈਨੂੰ ਕਹਿਗੀ ਆ 
ਮੱਥਾ ਚੁੰਮ ਮੈਨੂੰ ਮਾਂ ਮੇਰੀ ਆਖੇ ਡਰ ਨਾ ਪੁੱਤ ਮੈ ਹੈਗੀ ਆ
– ਮਾਂ ਕਿਵੇਂ ਝੁਕਾਵਾਂ ਕਰਜ ਤੇਰਾ 
ਮੈਨੂੰ ਸਮਝ ਇਹ ਆਈ ਨਾ 
ਮੈਂ ਬਣ ਜਾਣਾ ਤੇਰਾ ਸਹਾਰਾ ਮਾਂ 
ਤੂੰ ਸ਼ਰਨ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ 
ਮਾਂ ਮੈਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ…

Title: MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry