
Ohde khayalan di ikk shooh nu..!!
Uston bina eh saah vi na kam de ne
Oh lazmi e meri rooh nu..!!

Woh Nahi jaanti maine kis kadar aapno ko khoyeaa hai
Vikram jo hasaata tha kabhi auroon ko
Aaaj woh kitna foot foott royea hai
वो नही जानती मैंने किस कदर अपनों को खोया है,
विक्रम जो हँसाता था कभी औरों को आज वो कितना फूट फूट रोया है।
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…