सोचू तेरे बारे में तो इतना मैं मुस्कुराऊ,
सामने जब तू आए तो कभी नजरों को रोकू,
तो कभी दिल को समझाऊं,
नादान है ये दिल ज़रा की मानता ही नहीं है,
सब कुछ जानने के भी बाद भी,
ये कुछ जानता हि नहीं है,
कभी खुद को संभालू तो कभी खुद को समझाऊं,
क्यों हर दिन और मैं तेरे जैसा होता जाउ,
ख्याल तेरा जब भी आए,
न जाने क्यों मैं फिर सो ना पाउं,
कभी खुद को रोकू तो कभी दिल को समझाऊं !
खमियाज़ा ए ज़िन्दगी हर पल मिलता है,
कोई कुछ वक्त तो कोई ज़िन्दगी भर साथ चलता है...
मैं अपनी राहों पर अब अकेले निकाल आया हूं,
जो वक्त सबका था कुछ अपने लिए लाया हूं...
शीशे की कब्र में दफ्न जैसे कोई राज़ हूं,
बरसों से अनसुना जैसे कोई साज़ हूं...
ज़िन्दगी का हाथ थाम कर अब चलने की गुज़ारिश है,
सपनों से तर आगे समंदर और बारिश है...
इक दिन समंदर और बारिश भी पार कर जाऊंगा,
सबकी नज़रें होगी मुझपे और मैं ज़िन्दगी गुलज़ार कर जाऊंगा....