Asi ni chete hauna ohna soortan nu
sadhe dil vich jo ajhe v dharkdiyaan ne
ਅਸੀਂ ਨੀ ਚੇਤੇ ਹੋਣਾ ਉਹਨਾ ਸੂਰਤਾਂ ਨੂੰ
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਜੋ ਅਜੇ ਵੀ ਧੜਕਦੀਆਂ ਨੇ
Asi ni chete hauna ohna soortan nu
sadhe dil vich jo ajhe v dharkdiyaan ne
ਅਸੀਂ ਨੀ ਚੇਤੇ ਹੋਣਾ ਉਹਨਾ ਸੂਰਤਾਂ ਨੂੰ
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਜੋ ਅਜੇ ਵੀ ਧੜਕਦੀਆਂ ਨੇ
Tere aane ki khushi likhi hai meine
Tere hone ka ahesaas likha hai
Teri har baat ka jawaab likha hai meine
Shuru se anth tak tere saath rahene ka ek khubsurat safar likha hain
Teri julfo ka vo savaarna likha hai meine
Teri har aada ka ijhaar likha hai meine
Tere saath rahena likha hai meine
Tera meri zindagi mei hona hi kimti hain isliye rab se koi fariyaad nhi likhi hai meine……
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में
लेकिन उस जल्वा-गह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं
मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त
आह अब मुझ से तिरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा
आज ही ख़ातिर-ए-बीमार शकेबा भी नहीं
बात ये है कि सुकून-ए-दिल-ए-वहशी का मक़ाम
कुंज-ए-ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ’त-ए-सहरा भी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
आह ये मजमा-ए-अहबाब ये बज़्म-ए-ख़ामोश
आज महफ़िल में ‘फ़िराक़’-ए-सुख़न-आरा भी नहीं
ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर
ये भी सच है कि तिरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं
यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना-ए-इश्क़
मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं
फ़ितरत-ए-हुस्न तो मा’लूम है तुझ को हमदम
चारा ही क्या है ब-जुज़ सब्र सो होता भी नहीं
मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि ‘फ़िराक़’
है तिरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं