
Kon samjhe peerh ohna raatan di..!!
Ohde naal mohobbat kinni c
Ohne kadar hi na payi jazbatan di..!!

ਇਕ ਕਿਤਾਬ ਖੋਲੀ ਪੁਰਾਣੀ ਕੱਲ
ਵਿੱਚ ਯਾਦਾਂ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਮਹਿਕਾਂ ਖਿਲਾਰਣ
ਦਿਲ ਦਾ ਹਾਲ ਜੋ ਵਿੱਚ ਲਿਖਿਆ ਸੀ
ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਕਰੀਬ ਸੀ
ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆ
ਉਹ ਜਾਨ ਸੀ
ਪਰ ਜਾਣ ਕੇ ਵੀ ਅਨਜਾਣ ਸੀ
कोई खास नही,
पर है अपनो सा लगाव
नाम नही इस रिश्ता का,
मगर प्यार है बेहिसाब
खुशी छोटी ही क्यों न हो,
मगर जश्न का ना है हिसाब
गैरो के गम को भी अपना बनाकर
ये भी करते है विलाप
मुश्किल कितनी ही बड़ी क्यो न हो,
रहती हमेशा दिल में एक आश
कोई साथ हो या न हो
बस ये दोस्त ही है जो रहते है हमेशा साथ
ये दोस्त भी क्या लाज़वाब होते है,
और इनकी दोस्ती भी उतनी ही लाजवाब❤️