
Kon samjhe peerh ohna raatan di..!!
Ohde naal mohobbat kinni c
Ohne kadar hi na payi jazbatan di..!!

Zindagi de rang fullan varge hone c
Je oh apna keh ke piche na hatdi 💔
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਰੰਗ ਫੁੱਲਾਂ ਵਰਗੇ ਹੋਣੇ ਸੀ।
ਜੇ ਓਹ ਆਪਣਾ ਕਹਿ ਕੇ ਪਿੱਛੇ ਨਾ ਹੱਟਦੀ ।। 💔
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।