Kade padh k vekhyo janab
Saadiyan akhan nu,
Etthe dariya vagda ya
Tuhadi mohabat da.
ਤੇਰਾ ਰੋਹਿਤ…✍🏻
Kade padh k vekhyo janab
Saadiyan akhan nu,
Etthe dariya vagda ya
Tuhadi mohabat da.
ਤੇਰਾ ਰੋਹਿਤ…✍🏻
मंजिल दूर और सफ़र बहुत है,
छोटी सी ज़िन्दगी और फिक्र बहुत है,
मार डालता ये जहान कब का हमें,
पर मेरी माँ की दुआओं में असर बहुत है…
किस्मतों से मिलती है माँ की ममता,
उस ममता में प्यार कभी नही थमता,
खुश-किस्मत हु मैं जो माँ का प्यार मिला,
ज़िन्दगी से मुझे नही है कोई गिला…
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।