Jaan lagi oh keh gyi c,
K menu yaad na kri ,,,
Te Asi aaj vi ohdiya yaada nu,
Sambh ke betha aa …💔
ਜਾਣ ਲੱਗੀ ਉਹ ਕਹਿ ਗਈ ਸੀ
ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਾ ਕਰੀਂ,,,
ਤੇ ਅਸੀਂ ਅੱਜ ਵੀ ਓਹਦੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨੂੰ,
ਸਾਂਭ ਕੇ ਬੈਠੇ ਆ…💔
Jaan lagi oh keh gyi c,
K menu yaad na kri ,,,
Te Asi aaj vi ohdiya yaada nu,
Sambh ke betha aa …💔
ਜਾਣ ਲੱਗੀ ਉਹ ਕਹਿ ਗਈ ਸੀ
ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਾ ਕਰੀਂ,,,
ਤੇ ਅਸੀਂ ਅੱਜ ਵੀ ਓਹਦੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨੂੰ,
ਸਾਂਭ ਕੇ ਬੈਠੇ ਆ…💔
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
Kive keh deya ke thakk gya haan mein
Pta nhi kinniya jimmewariyan judiyan ne mere naal..
ਕਿਵੇਂ ਕਹਿ ਦਿਆਂ ਕਿ ਥੱਕ ਗਿਆ ਹਾਂ ਮੈਂ,
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਕਿੰਨੀਆਂ ਜਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਜੁੜੀਆਂ ਨੇ ਮੇਰੇ ਨਾਲ..