
Mohobbat da ek khoobsurat ehsaas e..!!

Aaj uski yaad ne phir rula diya,
Kaisa hai yeh chehra jisne yeh sila diya,
Do lafz likhne ka salika na tha
Uski yaad ne mujhe shahar bana diya
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
ठोकरें बहुत है राह में,बीत गए वो दिन रैन,
सोचा ना था यूं सौदा करूंगा,
बूंदों सी बारिश में प्यासा चलूंगा,
पसीने से तर है दामन मेरा
कैसे बायां करूं हाल ए दिल अपना के,
कैसे भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
शाम भी बीत गई, सूरज भी ढल गया,
रास्तों पर निकला तो वक्त भी बदल गया,
ठोकरें बहुत खाई अब थोड़ा संभाल गया,
किससे कहूं फिर भी भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बैचेन,
मेरा हिस्सा था जिनमें कुछ लम्हे चुरा लाया हूं,
हर कदम के साथ कुछ करीब आया हूं,
किनारों पर समेटकर कुछ लेहरें लाया हूं,
दो पल ही सही वापस आए वो दिन रैन,
मै ही हूं वो मुसाफिर, मै ही था बेचैन…