tu khaab na vekheyaa kar saabi khaaba vich aujuga
me pagal shayar aa ishq te laajuga
me pagal shayar aa ishq te laajuga
ਤੂੰ ਖਾਬ ਨਾ ਵੇਖਿਆ ਕਰ “ਸਾਬੀ” ਖਾਬਾ ਵਿੱਚ ਆਜੂਗਾਂ !…
ਮੈਂ ਪਾਗਲ ਸ਼ਾਇਰ ਆਂ ਇਸ਼ਕ ਤੇ ਲਾਜੂਗਾਂ !..
ये चांद ये रात वो तारे
सब तो है मेरे पास
और क्या चाहिए तुझे
कुछ बाते कुछ किस्से और मुलाकात
सब तो है मेरे पास
और क्या चाहिए तुझे
हसना रोना और मुस्कुराना
तेरे बाद दिल को बहलाना
वो कागज वो अल्फाज और तेरी याद
सब तो है मेरे पास
और क्या चाहिए…..
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...