tu khaab na vekheyaa kar saabi khaaba vich aujuga
me pagal shayar aa ishq te laajuga
me pagal shayar aa ishq te laajuga
ਤੂੰ ਖਾਬ ਨਾ ਵੇਖਿਆ ਕਰ “ਸਾਬੀ” ਖਾਬਾ ਵਿੱਚ ਆਜੂਗਾਂ !…
ਮੈਂ ਪਾਗਲ ਸ਼ਾਇਰ ਆਂ ਇਸ਼ਕ ਤੇ ਲਾਜੂਗਾਂ !..
महंगा लिबास नहीं,
खाली जेब का हिसाब नहीं,
निखारनी है सीरत,
मुझे निखरी सूरत का क्या पता...
खुशियों की छांव नहीं,
ठंडी छांव में पांव नहीं,
मुझे मखमली चादर में सोने का
खिताब क्या पता...
पता है उन सुखी रोटियों की कीमत
जो किसी ने हाथ में थमा दी,
हं, मैं फकीर हूं,
मुझे सोने चांदी की कीमत क्या पता...
khushiyaan to kab kee rooth gayee hain kaash kee,
is zindagee ko bhee kisee kee nazar lag jaaye..
खुशियाँ तो कब की रूठ गयी हैं काश की,
इस ज़िन्दगी को भी किसी की नज़र लग जाये..