
Te tenu mere sajjna koi khabran hi naa..!!

कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम,
आज वो रिश्ते यूँ रुसवा हो गए |
मेरी होंठो पे हंसी देखेंगे हर दम,
कहने वाले आज बेगाने हो गए|
आँखों में खुशियों की चमक देने वाले,
आज उदासी का आलम दे गए |
छोटी – सी बात का तल्ख क्यूँ इतना,
प्यार के वादे का हर जुमला झूठे हो गए |
इश्क में जला करते थे जो दिन – रात,
अब वो परवाने नफ़रत में जल गए |
हो जाती सुलह माफ़ी दिल में रखने से,
वो तो अपनी जिद के पैमाने हो गए|
हार में ही होती है, मुहब्बत की जीत
जीतने की जुस्तजू में वो जुदा हो गए |
दिल धड़कता था जिसके लिए हर पल,
वो दिल अब खौफजदा हो गए|
पहुंच जाते थे मेरी खामोशी में जो मुझ तक,
वही आज लफ्जों में अलविदा कह गए||
हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते थे
हार हो या जीत एक दुसरे का हमेशा साथ दिया करते थे
कभी हम तुमसे कभी तुम हमसे रूठ जाया करते थे
फिर हम तुम्हे और कभी तुम हमें मना लिया करते थे
एक दूसरे की खुद से ज्यादा परवाह किया करते थे
ये बात बस कल की ही लगती है
हम तुम अपनी दोस्ती पर कितना इतराया करते थे