
Tu sahwein khada nazar aawe..!!
Tera nitt aa milna injh sajjna
Menu pagl na kar jawe..!!

Chehre ton haase udd gye
Dil ch khamoshi shaai aa
Ohde shehr di hawa menu dass rhi aa
Ke ohnu ajj ek vaar fir ton meri yaad aayi aa..
ਚਿਹਰੇ ਤੋਂ ਹਾਸੇ ਉੱਡ ਗਏ
ਦਿਲ ‘ਚ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਛਾਈ ਆ
ਉਹਦੇ ਸ਼ਹਿਰ ਦੀ ਹਵਾ ਮੈਨੂੰ ਦੱਸ ਰਹੀ ਆ
ਕਿ ਉਹਨੂੰ ਅੱਜ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫਿਰ ਤੋਂ ਮੇਰੀ ਯਾਦ ਆੲੀ ਆ…. gumnaam ✍️✍️
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”