Enjoy Every Movement of life!
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
Saadhiyaan buraayiaan da shor har jagah hai
tu das tere sunan ch ki aayea
ਸਾਡੀਆਂ ਬੁਰਾਈਆਂ ਦਾ ਸ਼ੋਰ ਹਰ ਜਗਾ ਹੈ
ਤੂੰ ਦੱਸ ਤੇਰੇ ਸੁਣਨ ਚ ਕੀ ਆਇਆ !..
