इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
Tera rang Jo Chad gya sajjna ve
Rang duniya de vi fikk hoye..!!
Mere to Jada tu mere ch vasseya
Mein te tu jiwe ikk hoye..!!
ਤੇਰਾ ਰੰਗ ਜੋ ਚੜ੍ਹ ਗਿਆ ਸੱਜਣਾ ਵੇ
ਰੰਗ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਵੀ ਫਿੱਕ ਹੋਏ..!!
ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ‘ਚ ਵੱਸਿਆਂ ਏ
ਮੈਂ ਤੇ ਤੂੰ ਜਿਵੇਂ ਇੱਕ ਹੋਏ..!!