Unjh duniya te lok bathere ne
Tu fikar ohna di kar jo tere ne ❤
ਉਂਝ ਦੁਨੀਆਂ ਤੇ ਲੋਕ ਬਥੇਰੇ ਨੇ,
ਤੂੰ ਫ਼ਿਕਰ ਓਹਨਾ ਦੀ ਕਰ ਜੋ ਤੇਰੇ ਨੇ❤
Unjh duniya te lok bathere ne
Tu fikar ohna di kar jo tere ne ❤
ਉਂਝ ਦੁਨੀਆਂ ਤੇ ਲੋਕ ਬਥੇਰੇ ਨੇ,
ਤੂੰ ਫ਼ਿਕਰ ਓਹਨਾ ਦੀ ਕਰ ਜੋ ਤੇਰੇ ਨੇ❤
मैं दर्द की इंतहा पर हूं
मैं एक शख्स का बुलाया हुआ हूं
लोग मुझको गमगीन समझते हैं
मैं एक शख्स का सताया हुआ हूं
नहीं है मुझ पर कोई कर्जा
मैं हर रिश्ते को निभाया हुआ हूं
मैं लोगों से नहीं मिलता अक्सर
मैं एक राज को छुपाया हुआ हूं
मिस्बाह परवाह नहीं है रोशनी की
मैं एक शमा जला या हुआ हूं
main dard kee intaha par hoon
main ek shakhs ka bulaaya hua hoon
log mujhako gamageen samajhate hain
main ek shakhs ka sataaya hua hoon
nahin hai mujh par koee karja
main har rishte ko nibhaaya hua hoon
main logon se nahin milata aksar
main ek raaj ko chhupaaya hua hoon
misbah parvaah nahin hai roshanee kee
main ek shama jalaaya hua hoon
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।