
tumhe sangeet aur khud ko me gayak samjhta hu
auro ke vicharon se nahi avgat me itna hu
me bas kavya hu tera tumhe sheershak samjhta hu

मुक्कमल भले प्यार हमारा न हुआ……..
उनका हक जताना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
गलत साबित हुए हमेशा…………
उनका हमे आजमाना भी कयामत था ठुकराना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
किताब के कहीं किसी पन्ने पर तो होंगे जरूर……..
उनका याद आना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
एक रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो लगा कोई आया होगा..
आख़िर देर रात ये है कौन। कहीं कोई बुरी खबर तो ना लाया होगा..?
बिस्तर से उठा घबराहट के साथ, रात ताला भी तो लगाया होगा..
चाबी ना जाने कहां रख दी मैंने, ऐसा होगा, रात दिमाग में ना आया होगा..
चाबी लेकर दौड़ा दरवाजे की ओर, दरवाजा तो खोलू, शायद कोई घबराया होगा..
दरवाज़ा खोला कोई नहीं था, ये कोई मज़ाक का वक़्त है, जो दरवाज़ा खटखटाया
होगा..
ना जाने कौन था ये, जो इतनी रात गऐ मेरे दर पे आया होगा..?
पूरी रात निकल गई सोचने में, ये मेरा वहम था, या सच में कोई आया होगा..