Bina Suraj De Kade Savera Nahi Hunda
Jinvein Raat De Bina Hanera Nahi Hunda
Nibhauna Painda Ae Rishteyan Nu
Sirf Pyaar Nu Pyarr Keh Dena Hi Bathera Nahi Hunda
Bina Suraj De Kade Savera Nahi Hunda
Jinvein Raat De Bina Hanera Nahi Hunda
Nibhauna Painda Ae Rishteyan Nu
Sirf Pyaar Nu Pyarr Keh Dena Hi Bathera Nahi Hunda
Ik dua di aas vich me saari raat jageyaan
par koi taraa ambron na tutteya
jisdi tasveer me naina ch sambhi baitha
ohne kade sadha haal na puchheya
ਇਕ ਦੁਆ ਦੀ ਆਸ ਵਿਚ ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਰਾਤ ਜਾਗਿਆਂ
ਪਰ ਕੋਈ ਤਾਰਾ ਅੰਬਰੋਂ ਨਾ ਟੁਟਿਆ
ਜਿਸਦੀ ਤਸਵੀਰ ਮੈਂ ਨੈਣਾਂ ‘ਚ ਸਾਂਭੀ ਬੈਠਾ
ਉਹਨੇ ਕਦੇ ਸਾਡਾ ਹਾਲ ਵੀ ਨਾ ਪੁਛਿਆ
एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?”
“बाग में।” बीरबल बोला।
वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, “वह कहां रहता है ?”
“अपने घर में।” बीरबल ने उत्तर दिया।
हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, “तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?”
“क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।” बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।
“क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ?” उस आदमी ने फिर सवाल किया।
“नहीं।’ बीरबल का जवाब था।
वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, “बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?” “हां, मैं जानता हूं।” जवाब मिला।
“तुम्हारा क्या नाम है ?” आदमी ने पूछा।
“बीरबल।” बीरबल ने उत्तर दिया।
अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।
“तुम भी क्या आदमी हो…” कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, “मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?”
“मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !”
अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।