
Esa yaar hon da ki fayida..!!
Jithe mile na mojudgi allah di
Othe pyar hon da ki fayida..!!

HAMAIN KHUD KO SIRF TERE DAAYRE TAK HI TO MEHDOOD RAKHNA HAI
MOHABBAT SE ISHQUE KA YEH SAFAR OOROOJ SE ZAWAAL KI JAANIB TO AAYE GA NAHI
ہمیں خود کو صرف تیرے دائرے تک ہی تو محدود رکھنا ہے
محبّت سے عشق کا یہ سفر عروج سے زوال کی جانب تو آئے گا نہیں
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है