प्यार किया तो छोड़के जाना जरूरी था क्या
सपना दिखाकर तोड़ना मजबूरी था क्या
हीर रांझे की दी हुई कसमे भी फर्जी था क्या
वक़्त और समझौता के हवाला देकर
प्यार का नया ताज पहनना जरूरी था क्या।
प्यार किया तो छोड़के जाना जरूरी था क्या।
By- lalan raj
प्यार किया तो छोड़के जाना जरूरी था क्या
सपना दिखाकर तोड़ना मजबूरी था क्या
हीर रांझे की दी हुई कसमे भी फर्जी था क्या
वक़्त और समझौता के हवाला देकर
प्यार का नया ताज पहनना जरूरी था क्या।
प्यार किया तो छोड़के जाना जरूरी था क्या।
By- lalan raj
नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया, मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया। फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर, गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया। सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो, नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया। कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत, सद्भावना के फूल पिरोता चला गया। जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं, विश्वास अपने आप पर होता चला गया। अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां, मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया। उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग, हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...