
howi naa saatho door ve
mar jaange tere bina
je chun lya tu koi hor ve
Enjoy Every Movement of life!

शर्माकर एक दिन इन्हीं आँखों ने, मेरे प्यार को कुबूला था..
इन्हीं पलकों के साए में रह कर कभी, पिछले गमों को भुला था..
उनका इश्क, नफ़रत में कब बदला, हमें ख़बर भी ना लगी..
उनके ज़हन से मेरा नाम ऐसे मिटा जैसे, परदेसी कोई सारे गांव को भूला था..

Kisi ne koshish bhi naa ki , sab kehte rahe is me akad bahut hai …