Pyar v bahut azeeb aa
jis insaan nu paayea v na howe
us nu v khohan da darr lageyaa rehnda
ਪਿਆਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਅਜੀਬ ਆ,
ਜਿਸ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਪਾਇਆ ਵੀ ਨਾ ਹੋਵੇ,
ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ ਲੱਗਿਆ ਰਹਿੰਦਾ
Pyar v bahut azeeb aa
jis insaan nu paayea v na howe
us nu v khohan da darr lageyaa rehnda
ਪਿਆਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਅਜੀਬ ਆ,
ਜਿਸ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਪਾਇਆ ਵੀ ਨਾ ਹੋਵੇ,
ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ ਲੱਗਿਆ ਰਹਿੰਦਾ
हमारे बिन तुम अधूरे ही रहोगे,
किसी ने चाहा शिद्दत से ऐसा तुम खुद कहोगे,
हम न होंगे मौजूद तो ये आलम भी कहेगा,
मिलेंगे तुझको बहुत पर हम जैसा पागल कोई ओर
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?