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Pyara dost || Hindi shayari on dost

Aasman se Tod kar sitara diya hai,
Aalam-e-tanhaai mein ek sharara diya hai❤️
Meri kismat bhi naaz karti hai mujpe
Khuda ne dost hi itna pyara diya hai🥰

आसमान से तोड़ कर सितारा दिया है,
आलम-ए-तन्हाई में एक शरारा दिया है,❤️
मेरी किस्मत भी नाज़ करती है मुझपे,
खुदा ने दोस्त ही इतना प्यारा दिया है।🥰


Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


kise mehboob di Manzik || punjabi poetry

ਮੁੱਠੀ ਵਿਚ ਰੱਖਦਾ ਕੁਝ ਬੀਜ ਸੁਪਨਿਆਂ ਦੇ,
ਉਗਾਓਣਾ ਚਾਹਵਾਂ ਡਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿਤੇ ਬੰਜਰ ਨਾ ਹੋਵਾ
ਮੈਂ ਅਕਸਰ ਫਿਦਾ ਹੁੰਦਿਆਂ ਦੇਖੇਆ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪੱਥਰਾ ਤੇ ਮੂਰਤੀਆਂ ਤੇ…
ਮੈਂ ਡਰਦਾ ਕਿਤੇ ਪੱਥਰਾ ਨੂੰ ਤਰਾਸ਼ਣ ਵਾਲਾ ਖੰਜਰ ਨਾ ਹੋਵਾ
ਜੀ ਤੇ ਬਹੁਤ ਚਾਹੁੰਦਾ, ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ਤੋਂ ਤੰਗ ਆ ਕੇ ਕਰ ਲਵਾਂ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ…
ਪਰ ਡਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿਸੇ ਮਹਿਬੂਬ ਦੀ ਮੰਜਿਲ ਨਾਂ ਹੋਵਾ….

Title: kise mehboob di Manzik || punjabi poetry


Love poetry || Hindi Poems on mohobbat

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।

कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।

आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।

मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।

चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।

प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।

यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।

इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।

मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।

दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।

Title: Love poetry || Hindi Poems on mohobbat