Qubool kar khuda, zaroorat tujhe bhi hai,
Mein muthi bhar tere liye bhi duayein laya hun…
कबूल कर खुदा, जरूरत तुझे भी है,
मैं मुट्ठी भर तेरे लिए भी दुआएं लाया हूं…
Qubool kar khuda, zaroorat tujhe bhi hai,
Mein muthi bhar tere liye bhi duayein laya hun…
कबूल कर खुदा, जरूरत तुझे भी है,
मैं मुट्ठी भर तेरे लिए भी दुआएं लाया हूं…
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए
Bawafa nahi c , shayad majboor c
Sanu chaddan ch , na ohda kasoor c
adhure mukaam te ,gayi chadd c
Ohda chaddna , shayad allah nu makroor c💔
ਬੇਵਫਾ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਸ਼ਾਇਦ ਮਜ਼ਬੂਰ ਸੀ
ਸਾਨੂੰ ਛੱਡਣ ‘ਚ, ਨਾ ਓਹਦਾ ਕਸੂਰ ਸੀ
ਅਧੂਰੇ ਮੁਕਾਮ ਤੇ, ਗਈ ਛੱਡ ਸੀ
ਉਹਦਾ ਛੱਡਣਾ ਸ਼ਾਇਦ ਅੱਲ੍ਹਾ ਨੂੰ ਮਕਰੂਰ ਸੀ💔
(makroor- kabool)