Raah kithe khatam hude ne
zindagi de safar ton
manzil taan ohi a
jithe khahish khatam ho jawe
ਰਾਹ ਕਿੱਥੇ ਖਤਮ ਹੁੰਦੇ ਨੇ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਸਫਰ ਤੋਂ
ਮੰਜ਼ਿਲ ਤਾਂ ਓਹੀ ਆ
ਜਿੱਥੇ ਖਾਹਿਸ਼ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇ
Raah kithe khatam hude ne
zindagi de safar ton
manzil taan ohi a
jithe khahish khatam ho jawe
ਰਾਹ ਕਿੱਥੇ ਖਤਮ ਹੁੰਦੇ ਨੇ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਸਫਰ ਤੋਂ
ਮੰਜ਼ਿਲ ਤਾਂ ਓਹੀ ਆ
ਜਿੱਥੇ ਖਾਹਿਸ਼ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇ
1.Mushkil se pahuche the hum iss mukaam pe,
par ab to nafrat si ho gyi mahobat ke naam se.
2. kisi ka bhi meri taraf koi hamara nhi,
ek tere bina jindgi mein koi hamara nhi.
3. kese rok paye khud ko iss ilzaam ke baad,
mujhe bhi to neend aayi nhi har raat iss ahsaas ke baad.
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।