raat kyu tu udaas hai
kush pal thehar fir subaah ki aas hai
रात क्यों तू उदास है
कुछ पल ठहर फिर सुबह की आस है
raat kyu tu udaas hai
kush pal thehar fir subaah ki aas hai
रात क्यों तू उदास है
कुछ पल ठहर फिर सुबह की आस है
पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है,
ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम,
जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है..
palakon mein aansu aur dil mein dard soya hai,
hansane vaalo ko kya pata,
rone vaala kis kadar roya hai,
ye to bas vahee jaan sakata hai meree tanahaee ka aalam,
jisane jindagee mein kisee ko paane se pahale khoya hai..
कभी थकन के असर का पता नहीं चलता
वो साथ हो तो सफ़र का पता नहीं चलता
वही हुआ कि मैं आँखों में उसकी डूब गया
वो कह रहा था भँवर का पता नहीं चलता
उलझ के रह गया सैलाब कुर्रए-दिल से
नहीं तो दीदा-ए-तर का पता नहीं चलता
उसे भी खिड़कियाँ खोले ज़माना बीत गया
मुझे भी शामो-सहर का पता नहीं चलता
ये मंसबो का इलाक़ा है इसलिए शायद
किसी के नाम से घर का पता नहीं चलता